(आयुर्वेदीय भेषज संहिता समिति)

गठन– 20 सितंबर 1962, भारत सरकार द्वारा पत्र संख्या 14/8/62 I.S.M. निम्न कार्य सम्पन्न करने के लिए इसका गठन लिया गया-

1. एक अधिमानिक औषध योग संग्रह को दो भागों में तैयार करना-

  • एकल औषधि द्रव्य– जिसकी पहचान एवं चिकित्सीय उपयोगिता में कोई मानक नहीं है।
  • औषधि योग– ये अधिकांश आयुर्वेद के चिकित्सा में संपूर्ण देश में प्रयोग किए जाते है।

2. औषध की पहचान, गुणवत्ता और विशुद्धता के लिए परीक्षण निर्धारित करना।

3. भौतिक गुणों और सक्रिय घटकों में हर हाल में एक रूपता सुनिश्चित करना।

4. आयुर्वेदीय चिकित्सा में प्रयोग किए जाने वाले द्रव्य तथा औषध जो कि आयुर्वेद चिकित्सा या औषध
निर्माण के लिए आवश्यक है ,उनके लिए मानक तैयार करना।
5. निम्नलिखित के संबंध में सभी सूचनाए उपलब्ध कराना-

  • भेदक लक्षण
  • प्रयोग विधि
  • निर्माण की विधियाँ
  • विभिन्न अनुपात
  • मात्रा
  • विषाक्तता

गठन के पश्चात भारतीय भेषज-संहिता समिति ने निर्णय लिया की भारतीय आयुर्वेद योगसंग्रह को मुद्रित किया जाए, जिससे विद्द्यमान कानून के द्वारा आयुर्वेदीय औषधियों के निर्माण तथा विक्रय के लिए पर्याप्त सामग्री प्राप्त हो सके। इसके अलावा यह आयुर्वेदीय भेषज संहिता तथा एकल औषध द्रव्यों के योगसंग्रह का अग्रदूत होगा।

प्रकाशन

प्रथम भाग– सन 1978-444 आयुर्वेदीय औषध

द्वितीय भाग– सन 1990-192 आयुर्वेदीय औषध

तृतीय भाग – सन 2011-350 आयुर्वेदीय औषध

                                                                                                     By- Dr. Ranjeet Singh

Posted by:Ayur Plus